दिल्ली के सीबीएसई स्कूलों में क्या खास बात है?
विविधता, गुणवत्ता और वैश्विक विकास दिल्ली की शिक्षा प्रणाली को विशिष्ट बनाते हैं। दिल्ली के स्कूलों में आधुनिक और पारंपरिक शिक्षा शैलियों का अच्छा संतुलन है।
दिल्ली के संस्थानों में आमतौर पर सीबीएसई द्वारा संचालित एक संरचित पाठ्यक्रम होता है, जिसका उद्देश्य छात्रों को जेईई और नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना है।
दिल्ली में स्कूलों का बुनियादी ढांचा बेहतरीन तकनीकों से लैस है, जिसमें स्मार्ट क्लासरूम और अनुभवी शिक्षक मौजूद हैं, जो एक अच्छा शिक्षण वातावरण बनाते हैं।
दिल्ली इस मायने में अद्वितीय है कि यह शिक्षा और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों, खेल, कला और जीवन कौशल को एक साथ संतुलित करता है ताकि छात्र बौद्धिक और सामाजिक रूप से विकसित हो सकें।
विभिन्न संस्कृतियों और वैश्विक दृष्टिकोणों से अवगत कराना और भारत तथा वैश्विक क्षेत्रों पर विजय प्राप्त करने के लिए तैयार करना। शिक्षा का यह सर्वांगीण दृष्टिकोण दिल्ली को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए एक प्रमुख स्थान बनाता है।
दिल्ली में सीबीएसई स्कूलों की शुल्क संरचना
दिल्ली में सीबीएसई स्कूलों की फीस संरचना संस्थान के प्रकार और दी जाने वाली सुविधाओं के आधार पर भिन्न होती है।
निजी सीबीएसई स्कूलों की फीस में काफी अंतर होता है, जो सालाना ₹50,000 से लेकर ₹2,50,000 तक होती है। फीस में आमतौर पर ट्यूशन फीस, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां और बुनियादी ढांचागत सुविधाएं शामिल होती हैं।
कुछ स्कूल मध्यम श्रेणी की शुल्क संरचनाएँ प्रदान करते हैं, जो आमतौर पर खेल, प्रयोगशालाओं और पाठ्येतर गतिविधियों जैसी सुविधाओं के आधार पर प्रति वर्ष €20,000 से €1,00,000 के बीच होती हैं।
दिल्ली में सीबीएसई से संबद्ध सरकारी स्कूल आमतौर पर न्यूनतम शुल्क लेते हैं, जो प्रति वर्ष ₹500 से ₹2,000 तक होता है, जिससे वे अधिकांश परिवारों के लिए अत्यधिक किफायती हो जाते हैं।
अभिभावकों को परिवहन, वर्दी, किताबें और पाठ्येतर गतिविधियों के लिए अतिरिक्त खर्च करने पड़ सकते हैं, जो सालाना 10,000 से 50,000 ₹ तक हो सकते हैं।



















